दम न था

तेरे वादों में दम न था
तेरी यादों में दमखम था 
वो जो टूटा है आखिरकार 
बस वही एक भरम था

नसीबों की लकीरों में 
तेरा चेहरा ही कम था
मेरी आंखों की बस्ती में 
सिर्फ यादों का आलम था

मोहब्बत की वफाओं में 
तेरा हिस्सा ही कम था
मेरे हिस्से की रातों में 
सहरों का मातम था 

जिसे समझा था हकीकत 
वो महज एक सितम था
तेरे वादों में दम न था 
तेरी यादों में दमखम था 

जफायें सह के भी समीर 
दिल में कोई गम न था
तूने जो जख्म दिए दिल पर
वो तेरा ही करम था 

तेरी वादों में दम न था 
तेरी यादों में दमखम था!
©®जीवन समीर 

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