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प्रेम का टेंडर :नीलामी और शर्तें

चलो नीलामी करते हैं प्रेम की तुम्हारे अंतर्मन में विज्ञप्ति छपवाते हैं  देखें कितने ठेकेदारों द्वारा  बोली लगाई जाती है।  पर सुनो, यह बाजार का टेंडर नहीं यहाँ सिक्कों की खनक वर्जित है।  इस नीलामी की निविदा भरने की  कुछ शर्तें बहुत अनिवार्य हैं : 1-पात्रता - वही ठेकेदार यहाँ अर्जी लगा पाएगा  जिसने 'स्व' को खोकर सर्वस्व पाया हो जिसके पास पिछली नाकामियों का अनुभव हो और टूटे दिल की मरम्मत का हुनर आया हो।  2-अमानत राशि- गारंटी के तौर पर सोना चांदी नहीं तुम्हें अपनी रातों की नींद जमा करनी होगी  धडकनों का हिसाब एडवांस देना होगा  और वफा की वसीयत साथ रखनी होगी।  3-तकनीकी बिड- देखा जाएगा कि तुम्हारी रूह कितनी पारदर्शी है क्या तुम आंसुओं को मुस्कराहट में बदल सकते हो? क्या मुश्किलों के उबडखाबड रास्तों पर बिना हाथ छुडाये उम्र भर चल सकते हो? 4-वित्तीय बिड- यहाँ सबसे ऊंची बोली उसकी नहीं होगी  जो महलों के ख्वाब दिखाएगा। टेंडर उसके नाम खुलेगा - जो अपनी पूरी हस्ती, मेरे नाम कर जाएगा । निर्णय की घोषणा - नीलामी का सबसे ज्यादा मूल्य  उसकी खामोशी का...

खार पर लिखी प्रतीक्षा

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अवसादों के उन अंतहीन श्रृंखलाओं में उलझ मैने तुम्हें विवश, अनायास एकाकी खड़ा देखा है स्मृतियों की परछाइयों से जब मन ऊब गया  तब विरह की प्रखर धूप में तुम्हें तपते देखा है कुंतल अस्त-व्यस्त, श्रृंगार सब बिखर गया नयनों में अधूरी प्यास की करुण भाषा है हिमखंड सी जम गई है पलकों की ये पोरें शायद पत्थर हो चुकी कोई पुरानी आशा है न जाने किस निष्ठुर नियति की आस में, कहीं द्वार पर तू अपलक पंथ निहारे खड़ तोतो नहीं! खग कुल के कलरव में, समय की पदचाप सी घड़ कीकी उस टिक टिक को तुमने अलार्म सुना है रंगों और सुगंधों के धुंधले स्वप्न लोक में  तुम्हें मन ही मन कोई गीत गुनगुनाते हुए सुना है सबकुछ थरथराता हुआ, दृष्टि बुझी बुझी सी अधरों पर मौन चीखों की एक परिभाषा है दरकते पर्वतों सी देह पर खिंची ये लकीरें थक चुकी चेतना की अंतिम अभिलाषा है न जाने किस महाशून्य की प्रतीक्षा में,  कहीं खार की ढेरी पर तू अमर ग्रंथ बनी पड़ी तो नहीं!