प्रेम का टेंडर :नीलामी और शर्तें

चलो नीलामी करते हैं प्रेम की
तुम्हारे अंतर्मन में विज्ञप्ति छपवाते हैं 
देखें कितने ठेकेदारों द्वारा 
बोली लगाई जाती है। 

पर सुनो, यह बाजार का टेंडर नहीं
यहाँ सिक्कों की खनक वर्जित है। 
इस नीलामी की निविदा भरने की 
कुछ शर्तें बहुत अनिवार्य हैं :

1-पात्रता -
वही ठेकेदार यहाँ अर्जी लगा पाएगा 
जिसने 'स्व' को खोकर सर्वस्व पाया हो
जिसके पास पिछली नाकामियों का अनुभव हो
और टूटे दिल की मरम्मत का हुनर आया हो। 

2-अमानत राशि-
गारंटी के तौर पर सोना चांदी नहीं
तुम्हें अपनी रातों की नींद जमा करनी होगी 
धडकनों का हिसाब एडवांस देना होगा 
और वफा की वसीयत साथ रखनी होगी। 

3-तकनीकी बिड-
देखा जाएगा कि तुम्हारी रूह कितनी पारदर्शी है
क्या तुम आंसुओं को मुस्कराहट में बदल सकते हो?
क्या मुश्किलों के उबडखाबड रास्तों पर
बिना हाथ छुडाये उम्र भर चल सकते हो?

4-वित्तीय बिड-
यहाँ सबसे ऊंची बोली उसकी नहीं होगी 
जो महलों के ख्वाब दिखाएगा।
टेंडर उसके नाम खुलेगा -
जो अपनी पूरी हस्ती, मेरे नाम कर जाएगा ।

निर्णय की घोषणा -
नीलामी का सबसे ज्यादा मूल्य 
उसकी खामोशी का होगा 
यह टेंडर उसी के नाम जाएगा 
जिसके पास समर्पण का सबसे साफ रिकार्ड होगा। 

प्रक्रिया व्यवस्थित है, शर्तें सख्त हैं
अब सिर्फ तुम्हारे हस्ताक्षर की प्रतीक्षा है 
मंजूर है क्या तुम्हें?
तुम्हारी स्वीकृति ही मेरा अंतिम निर्णय होगा। 

प्रेम की स्वीकृति पत्र -
प्रेषक - अंतर्मन की गहराइयाँ
दिनांक - शाश्वत काल
विषय - प्रेम के टेंडर हेतु पूर्ण एवं अंतिम स्वीकृति।

तुम्हारी शर्तों के इश्तिहार को
मेरी रूह की दीवारों पर चस्पा कर दिया है। 
तुम्हारी कठिन निविदाओं को पढ़कर
मैने अपनी हस्ती को फना कर निर्णय लिया है। 

स्वीकृति की मुख्य शर्तें:
*बयाना राशि का भुगतान :मैने अपनी आंखों की पूरी नमी, तुम्हारी पलकों के बैंक में जमा कर दी है।
अब मेरी नींदों पर तुम्हारा अधिकार होगा 
यह गारंटी मैने वफा के नाम कर दी है। 

अनुबंध का कार्यान्वयन - मुझे मंजूर है तुम्हारी हर वो शर्त
जिसमें 'मैं' का अंत और 'हम' का आगाज हो।
मेरी धड़कनों के प्रोजेक्ट का बजट
अब सिर्फ तुम्हारी आवाज के पास हो। 

समय सीमा-यह अनुबंध किसी ऋतु या वर्ष का मोहताज नहीं
इसकी वैधता 'जन्मों-जन्मों' तक विस्तारित है
कोई 'एस्केलेशन क्लॉज' (बदलाव) यहाँ नहीं चलेगा,
मेरा समर्पण तुम्हारी रूह के प्रति मर्यादित है।

अंतिम मुहर-
ठेकेदारों की इस भीड़ में 
तुमने जो रूह की पारदर्शिता मांगी थी
मैने अपनी पूरी सादगी तुम्हारे नाम कर दी है। 
टेंडर की हर प्रक्रिया पर
मैने अपनी मौन स्वीकृति की मुहर लगा दी है। 
अतः तुम्हारी स्वीकृति का जो निर्णय था 
उसे मैने माथे पर सजा लिया है। 
अब यह प्रेम का टेंडर 
मैने अपनी नियति के नाम कर लिया है।

हस्ताक्षर - तुम्हारी प्रतीक्षा में बैठा एक समर्पित ह्रदय

प्रेम अनुबंध :विशेष दंड एवं शर्ते
धारा1-विलंब शुल्क - यदि तुम्हारी यादों के आने में तनिक भी देरी हुई
या वादे के मुताबिक मुलाकात की घड़ी फेरी हुई
तो जुर्माने के तौर पर तुम्हें 
अपनी एक शाम मेरे नाम लिखनी होगी
और सजा में सबेरे की पहली चाय मेरे साथ पीनी होगी।
धारा2-मौन का ऊल्लघंन - अगर बिना बताए तुम कभी खामोश हो जाओगे
और मेरे सवालों को अनसुना कर टाल जाओगे 
तो दंडस्वरूप तुम्हें -
मेरी मनपसंद कविता को दोहराना होगा
और अपनी मुस्कुराहट से इस सन्नाटे का हर्जाना भरना होगा। धारा3-अनुबंध का भंग-यदि कभी पलकों के किनारों पर नमी पाई गई
या किसी गलतफहमी की कोई दरार आई गई 
तो सुलह का 'क्लीयरेंस सर्टिफिकेट' तब तक न मिलेगा
जब तक तुम गले लगाकर 
पुरानी बातों को शून्य नहीं कर देते। 
धारा 4-कार्यक्षेत्र का विस्तार - इस प्रेम के कार्यक्षेत्र में कोई सीमा नहीं होगी
दुख मेरा होगा पर आंखें तुम्हारी नम होगी
अगर तुमने अकेले दर्द सहने की जुर्रत की 
तो पेनल्टी में तुम्हें 
अपनी सारी खुशियां मुझे सौंपनी होंगी।

अंतिम घोषणा -
इन शर्तों का उल्लंघन होने पर
कोई कचहरी या अदालत नहीं होगी
फैसला सिर्फ 'दिल की ज्यूरी' करेगी
और सजा सिर्फ इतनी होगी कि
तुम्हें फिर से नये सिरे से मुझसे प्रेम करना होगा ।

हस्ताक्षर - कानून - ए-इश्क के गवाह

प्रेम अनुबंध :अंतिम मुहर:
सब शर्तें तय हुई सब वादे पूर्ण हुए
अब न कोई सवाल होगा न कोई दलील होगी
तुम्हारे और मेरे बीच का यह टेंडर 
अब आत्मा की सबसे सुरक्षित तिजोरी में शील्ड है 

अंतिम घोषणा -
सील का प्रकार-अटूट विश्वास और समर्पण की लाख से
गवाह - चांद सितारे और हमारी अपनी खामोशियाँ
गोपनीयता - यह अनुबंध सिर्फ दो दिलों के बीच रहेगा दुनिया की नजरों से परे।
   "न अब कोई बोली लगेगी, न कोई विज्ञापन छपेगा
    जो तुम्हारा था वो तुम्हारा है और तुम्हारा ही रहेगा"

प्रेम - प्रशस्ति - -
विज्ञप्ति से शुरू हुआ था जो सिलसिला वो आज पूर्णतः स्वीकार हो गया। नीलामी की उन तमाम सख्त शर्तों के बीच एक रूह का दूसरी रूह से सरोकार हो गया। 

शर्त :न कोई शिकवा न कोई हिसाब होगा
बजट:धड़कनों का अब अटूट कोष होगा
लाभ:उम्रभर का साथ और बेपनाह संतोष होगा।
"सील कर दी है फाइल मैने वफा की स्याही से। >अब इस पर न कोई प्रश्न होगा न कोई जांच होगी। >इस प्रेम की इमारत में कभी न कोई आंच होगी।

उद्घाटन पर - इस नए सफर के आगाज के लिए
                जश्न - ए-मोहब्बत
आज सजाओ अंतर्मन को ये जीत का त्योहार है 
नीलामी के शोर के बाद मिला अब करार है
न कागजों की कड़वाहट न शर्तों की दीवारें 
अब तो खामोशियों का मधुर इकलौता सार है

वो टेंडर जो खुला तेरे नाम पर
उसे वफा के फूलों से महकाया जायेगा 
हर ईंट पर इस रिश्ते की
तुम्हारा ही नाम उकेरा जाएगा 

आओ इसका उद्घाटन करें
न रिवन कटेगा न कोई शोर होगा
बस एक नजर तुम देखना एक नजर मैं
और कायनात का रुख हमारी ओर होगा 

मुबारक हो तुम्हें ये ठेका उम्र भर का
जहाँ मुनाफा सिर्फ सुकून होगा 
और इस मोहब्बत की तामीर में
बस प्रभु का ही कानून होगा!
कृपया यह अनुबंध "लाइव" देखें

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