मौन तब भंग होता है जब अन्याय अत्याचार शोषण और दमन उसके आगे वीभत्स रूप ले लेता है और कवि की प्रतिभा का अवरूद्ध ज्वालामुखी अनायास ही फट पड़ता है । ह्रदय छलनी छलनी होकर शब्दों को गढता है और नया संसार रचता है।

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