यहां वहां न जाने कहां कहां हूँ मैं। अनायास हूँ लय में हूँ अयाचित हूँ आभासित हूँ। आयाम हूँ या फिर विराम हूँ...!
न जाने क्यों
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हलचल सी हो रही है जिंदगी में न जाने क्यों,
कोई चल पड़ा है सूनी राह में न जाने क्यों।
देखना जज्बात कराहते थे जहां कांटों में --
उन्ही राहों में फूल बिछ गये हैं न जाने क्यों।।
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